Corona virus की कब तक आ सकती है वैक्सीन?

Corona virus की कब तक आ सकती है वैक्सीन?

कोरोना वायरस के इलाज को लेकर वैक्सीन कब तक आएगी इसकी कोई स्पष्ट सीमा नहीं है. कई देश कोरोना वायरस से निपटने के लिए दवा बनाने की कोशिश में जुटे हैं लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई है.
इसके पहले फैले सार्स वायरस को लेकर भी अब तक कोई सटीक वैक्सीन नहीं बनाई जा सकी है. ऐसे में कोरोना की दवा जल्द बन जाएगी इस पर संशय की स्थिति है.
दूसरी ओर कुछ लोग ये सवाल भी उठा रहे हैं कि जब लक्षणों के आधार पर इलाज से कोरोना वायरस संक्रमण को दूर किया जा सकता है और लोग ठीक भी हो रहे हैं तो फिर इसके लिए अलग से दवा बनाने की क्या ज़रूरत है.
इसके जवाब में विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर कोरोना वायरस का इलाज ढूंढ लिया गया तो भविष्य में इसे फैलने से रोका जा सकता है. आने वाले समय में ये महामारी दुनिया को घुटनों पर न ला पाए इसके लिए ज़रूरी है कि कोरोना वायरस की दवा जल्द से जल्द बना ली जाए.
डॉ. एस.के सरीन कहते हैं, ”ये वायरस तेज़ी से अपना आकार बदल रहा है ऐसे में इसका इलाज और इसके लिए दवा बनाना आसान नहीं है. दूसरी दवाएं इस पर असर कर रही हैं लेकिन वो सटीक नहीं हैं. हेल्थकेयर वर्कर्स को हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन दी जा रही है, कुछ हद तक इसका इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि उन्हें संक्रमण से दूर रखा जा सके. लेकिन अगर सटीक इलाज की बात करें तो अब तक कुछ नहीं है.”
उन्होंने कहा कि एंटी-वायरल, एंटी बायोटिक्स के ज़रिए लोगों का इलाज किया जा रहा है. ख़ासकर वो लोग जो आईसीयू में भर्ती हैं. लेकिन जो लोग अपने आप ठीक हो रहे हैं वो इम्युनिटी की वजह से हो रहे हैं.
नई दवा बनाने की ज़रूरत को लेकर उठ रहे सवालों पर डॉ. सरीन कहते हैं कि लोग ठीक होने वालों का आंकड़ा देख रहे हैं लेकिन मरने वालों का आंकड़ा शायद नज़रअंदाज़ कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, ”दवाओं को लेकर ट्रायल चल रहे हैं. इबोला के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा को लेकर भी ट्रायल चल रहा है कि क्या ये कारगर हो सकती है. मेरी समझ में अभी हमें बहुत काम करने की ज़रूरत है.”
Corona virus से भारत में क्या हैं हालात?
डॉ. एस.के सरीन कहते हैं कि बाकी दुनिया के मुक़ाबले भारत में अभी कोरोना संक्रमण के मामलों की शुरुआत हुई है और आने वाले कुछ हफ़्तों में मामले बढ़ सकते हैं.
डॉ. सरीन का मानना है कि वायरस रिप्रोडक्शन रेट अगर हम नियंत्रित कर पाए तो बड़ी कामयाबी होगी. इसके लिए लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग और सैनेटाइजेशन काफ़ी महत्वपूर्ण है.
वो कहते हैं कि अगर वायरस संक्रमण बढ़ता है तो हालात बिगड़ सकते हैं. किसी एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे सामान्य व्यक्ति में संक्रमण का ख़तरा काफ़ी है और कम्युनिटी ट्रांसमिशन के मामले बढ़ सकते हैं.
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